लखनऊ के KGMU मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के यौन शोषण, जबरन गर्भपात और धर्मांतरण के दबाव से जुड़े मामले की जांच कर रही यूपी STF ने अपनी पड़ताल का दायरा आगरा और एटा मेडिकल कॉलेज तक बढ़ा दिया है। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपित डॉ. रमीजुद्दीन और उसके करीबी डॉ. रिजवान मलिक समेत 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं का एक संगठित नेटवर्क एक्टिव था।
इतना ही नहीं, ये नेटवर्क जकात के नाम पर हर महीने करीब 10 लाख रुपये का फंड जुटाता था, जिसका उपयोग नेटवर्क से जुड़े लोगों की जरूरतों, गतिविधियों और मतांतरण के तंत्र को विस्तार देने में किया जाता था। यूपी STF अब इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों, पैसों के लेनदेन और आरोपितों के आपसी संपर्कों की गहनता से कड़ियां जोड़ रही है।
एटा में डॉ. रिजवान की भूमिका संदिग्ध
यूपी STF की रिपोर्ट में डॉ. रमीज, डॉ. रिजवान मलिक और अदनान अंसारी के बीच संपर्कों का ब्योरा मिला है। जांच में ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम के एक सीक्रेट ग्रुप की जानकारी भी सामने आई है, जिसके तहत खास तरह की पुस्तकों व पत्रिकाओं के जरिए मेडिकल कॉलेजों में नए दाखिला लेने वाले छात्रों से संपर्क साधा जाता था।
डॉ. रिजवान मलिक करीब 5 साल तक एटा मेडिकल कॉलेज में तैनात रहा था, जहां अक्टूबर 2023 में असिस्टेंट प्रोफेसर की गाड़ी में तोड़फोड़ के मामले में तत्कालीन प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल व अकाउंटेंट अभिषेक के साथ उस पर भी केस दर्ज हुआ था। सूत्रों के अनुसार, एटा में तैनाती के दौरान अपने रसूख के बल पर गैर-मुस्लिम छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम प्रभावित कराने और सप्लीमेंट्री लगवाने के आरोप भी डॉ. रिजवान पर लगे हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
3 लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच से मिला 12 साल का 4TB डेटा और 500 से ज्यादा अश्लील वीडियो शामिल हैं। रमीज के पिता सलीमुद्दीन पर भी पूर्व में कई महिलाओं को प्रेमजाल में फंसाकर मतांतरण कराने के आरोप रहे हैं। यूपी STF अब यह पता लगाने में जुटी है कि पिता-पुत्र एक ही सिंडिकेट का हिस्सा थे या अलग-अलग गिरोह संचालित कर रहे थे।