CMHO डॉ.नरेश गोन्नाने पर बच्चे को फर्जी दस्तावेज के सहारे MBBS करवाने का आरोप


छिंदवाड़ा / विशेष संवाददाता
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश पोपली ने सीएमएचओ डॉ. नरेश गोन्नाने पर फर्जी दस्तावेज बनाकर अपने बेटे को मेडिकल ऑफिसर बनाने का गंभीर आरोप लगाया है. इसकी शिकायत मुख्यमंत्री सहित संबंधित विभाग को भेजी गई है.
ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की शिकायत
बीजेपी नेता रमेश पोपली ने शिकायत में आरोप लगाया “छिंदवाड़ा के CMHO डॉ. नरेश गोन्नाने अनुसूचित जाति में आते हैं. उनके बेटे जितेश गोन्नाने ने पहले कोटे का लाभ लेकर एमबीबीएस की पढ़ाई की और फिर नौकरी पाने के लिए ईडब्ल्यूएस का प्रमाण पत्र बनवाया और मेडिकल ऑफिसर की नौकरी हासिल कर ली. जबकि उनके पिता जिला स्वास्थ्य अधिकारी हैं, जिनकी सैलरी सालाना करीब 15 लाख है, जबकि सरकारी नियम के अनुसार ₹8 लाख से कम आमदनी वाले सामान्य कोटे के व्यक्ति का ही ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनता है.”
शिकायत में बताया गया “डॉ. नरेश गोन्नाने वर्तमान में छिंदवाडा जिले में प्रभारी मुख्य चिकित्सा एंव स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. ये पहले चिकित्सा अधिकारी के पद पर सिविल अस्पताल पांढुर्ना में पदस्थ रहे हैं. 10 फरवरी 2023 को वह अनुसूचित जनजाति (ST) कोटे से प्रमोट होकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बने. 01 अगस्त 2024 से वह डीएचओ के पद के साथ जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा में प्रभारी सिविल सर्जन के पद पर कार्यरत रहे. 01 जुलाई 2025 से डॉ. गोन्नाने को सिविल सर्जन सह अधीक्षक के पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया.”
डॉ.गोन्नाने का प्रमोशन एसटी कोटे से
शिकायत में ये भी बताया गया “डॉ. गोन्नाने की विभागीय वरिष्ठता सूची एवं सेवा रिकॉर्ड मे दर्ज दस्तावेजों के अनुसार जाति (हलबा) अनुसूचित जनजाति दर्ज है. इनकी मेडिकल आफिसर के पद पर नियुक्ति एवं जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर पदोन्नति भी अनुसूचित जनजाति कोटे से हुई है. इसके बाद उनके बेटे जितेश गोन्नाने ने सामान्य कोटे से गरीबी रेखा के नीचे वाला ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनाकर संविदा पर मेडिकल ऑफिसर की नौकरी भी हासिल की. वह फिलहाल पांढुर्णा के सिराठा उप स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर के पद पर हैं.”
सीएमएचओ ने सारे आरोप सिरे से नकारे
अपने ऊपर लगे आरोपों पर सीएमएचओ डॉ.नरेश गोन्नाने ने सफाई देते हुए कहा “उनके बेटे ने शुरुआत से ही जनरल कोटे में पढ़ाई की और जनरल कोटे में ही उसकी नौकरी लगी. बेटे की नौकरी से पिता का कोई लेना-देना नहीं होता. उसका अपना परिवार है. वह हमसे अलग रहता है. बेवजह परेशान करने के लिए झूठी शिकायत की गई है. इस मामले में कलेक्टर के साथ ही विभागीय जांच भी हो रही है. जांच में सारी असलियत सामने आ जाएगी. हम हर तरीके से दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं.




