क्राइम

रेप पीड़िता की सहेली का बयान सुन कांप जाएंगी आपकी रूह 

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पश्चिम बंगाल / विशेष संवाददाता 
 
                        आज़ादी के बाद से पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने का सपना देख रही भाजपा सरकार का सपना सन 2026 में पूर्ण हुआ है। सरकार बनाने के लिए जरूरी 148 का आंकड़ा भाजपा ने अपने खुद के बलबूते पा लिया है। विधानसभा चुनाव ने भाजपा ने कुल 207 सीटों पर विजय हासिल की है। भाजपा के जीत के बाद पिछले कुछ सालों से यहां हिंदू बहन बेटियों पर हुए अत्याचार की परत दर परत खुलती जा रही है । इस जीत के कई फैक्टर हैं, इनमें से एक हैं महिलाओं के खिलाफ हिंसा। पिछली सरकार में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के कई मामले सामने आए, जिन्हें सुन अब तक रूह काँप जाती है। ऐसा ही एक मामला है कामदूनी गैंगरेप, जो चुनावों में भी चर्चा में रहा।
 
अब चुनावी नतीजों के दिन इस गैंगरेप की पीड़िता की सहेली की एक वीडियो सामने आई, जिसे देख हर कोई उस भयावह घटना के बारे में फिर एक बार बात करने लगा। वीडियो में पीड़िता की सहेली रोते हुए कहती हैं, “कामदूनी में मेरी सहेली के साथ बलात्कार हुआ था। मैंने आंदोलन किया था। मेरे परिवार को टॉर्चर किया गया। मुझे जेल भी काटनी पड़ी। घर पर बमबारी भी हुई। जान से मारने की धमकियाँ मिली।
 

क्या है कामदूनी रेप केस?

साल 2013 में बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के कामदूनी गाँव में कॉलेज में पढ़ने वाली 20 साल की छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। यह घटना तब हुई, जब वह कॉलेज से एग्जाम देकर स्टेशन से अकेले घर लौट रही थी। तब सैफुल, अंसार अली, इमानुल इस्लाम, अमीनुल समेत 9 लोग छात्रा को पकड़कर खेत में ले गए और गैंगरेप किया।

और सिर्फ गैंगरेप ही नहीं, बल्कि तड़पा-तड़पाकर कर जान से भी मार डाला। उन लोगों ने छात्रा के साथ हैवानियत इतनी दिखाई कि उसके प्राइवेट पार्ट को रेप के दौरान फाड़ दिया गया। इसके अलावा उसकी टांग खींचकर नाभि तक चीर दी गई और उसे फेंकने से पहले वो जिंदा न बचे इसके लिए उसके गले को रेता गया।

लड़की के भाई ने इस मामले में बताया था कि जब वो खुद कामदूनी से लौट रहा था तो उसने आरोपितों को रास्ते में देखा था। अंसार अली और सैफुल बात कर रहे थे- “आज मजा बड़ा आया, अब घर चलना चाहिए।” इनके बाद उसने बाकी 6 लोगों को भी देखा था। लेकिन तब उसे कुछ पता नहीं था।

खबरों के अनुसार, जब लड़की का शव अगले दिन बरामद हुआ तो लड़की अधनंगी थी। उसके साथ हुई वीभत्सता को देख इस मामले का खूब विरोध हुआ था। उसकी सहेलियाँ दिल्ली तक आईं। लोगों का रोष देख फिर ये मामला सीआईडी को सौंपा गया। जाँच में आरोपितों के अपराध का खुलासा हुआ।

कानून कार्रवाई में लापरवाही और कोई न्याय नहीं

बाद में आरोपित गिरफ्तार भी हुए। लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे सबको राहत दी जाती रही। 9 में से 2 रफीकुल इस्लाम और नूर अली को सबूतों की कमी के कारण बरी किया गया। गोपाल नस्कर ट्रायल के दौरान ही मर गया। शेख इमानुल इस्लाम, अमीनुर इस्लाम और भोला नस्कर जिनको पहले 10 साल की सजा मिली थी, उन्हें भी 2023 मे 10000 का जमानत बॉन्ड लगाकर छोड़ दिया गया। अमीन अली को बाद में बरी किया गया और जो दो मुख्य दोषी बचे सैफुल अली और अंसार अली। जिन्हें फाँसी की सजा मुकर्रर हुई थी उनकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया।

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मुख्य संपादक : संजय पांडे

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