ट्रॉमा सर्जनों ने 7 घंटे की जटिल सर्जरी से बचाया 21 वर्षीय युवक का पैर

लता मंगेशकर हॉस्पिटल की ट्रॉमा टीम की बड़ी कामयाबी; हादसे में बुरी तरह कुचले पैर को काटने के बजाय किया पुनर्निर्माण
नागपुर /अमित वानखडे
एनकेपी साल्वे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एवं लता मंगेशकर हॉस्पिटल, हिंगना रोड की ट्रॉमा टीम ने सात घंटे की जटिल पुनर्निर्माण सर्जरी कर 21 वर्षीय युवक का बुरी तरह क्षतिग्रस्त पैर बचाने में सफलता हासिल की है। युवक यवतमाल जिले के एक दूरदराज गांव का रहने वाला है।
जानकारी के अनुसार, 21 वर्षीय पुन्नेश एक भीषण सड़क दुर्घटना में तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आ गया था। हादसे में उसका पैर बुरी तरह कुचल गया। प्रारंभिक उपचार के दौरान स्थानीय डॉक्टरों ने पैर की गंभीर स्थिति को देखते हुए अम्प्यूटेशन यानी पैर काटने की सलाह दी थी। इसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए नागपुर स्थित लता मंगेशकर हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।

लता मंगेशकर हॉस्पिटल की ट्रॉमा टीम की बड़ी कामयाबी; हादसे में बुरी तरह कुचले पैर को काटने के बजाय किया पुनर्निर्माण
नागपुर, 5 सितंबर 2026: एनकेपी साल्वे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एवं लता मंगेशकर हॉस्पिटल, हिंगना रोड की ट्रॉमा टीम ने सात घंटे की जटिल पुनर्निर्माण सर्जरी कर 21 वर्षीय युवक का बुरी तरह क्षतिग्रस्त पैर बचाने में सफलता हासिल की है। युवक यवतमाल जिले के एक दूरदराज गांव का रहने वाला है।

जानकारी के अनुसार, 21 वर्षीय पुन्नेश एक भीषण सड़क दुर्घटना में तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आ गया था। हादसे में उसका पैर बुरी तरह कुचल गया। प्रारंभिक उपचार के दौरान स्थानीय डॉक्टरों ने पैर की गंभीर स्थिति को देखते हुए अम्प्यूटेशन यानी पैर काटने की सलाह दी थी। इसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए नागपुर स्थित लता मंगेशकर हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
अस्पताल पहुंचने के बाद ऑर्थोपेडिक्स, प्लास्टिक सर्जरी और इंटेंसिव केयर विशेषज्ञों की ट्रॉमा टीम ने मरीज की स्थिति का विस्तृत आकलन किया। डॉक्टरों ने पैर काटने के बजाय उसे बचाने का प्रयास करने का निर्णय लिया।
ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रचित मित्रा ने सबसे पहले दुर्घटना में कुचली हुई हड्डियों को स्थिर किया। इसके बाद माइक्रोवैस्कुलर प्लास्टिक सर्जन डॉ. समीर महाकालकर ने अत्याधुनिक ‘फ्री टिश्यू ट्रांसफर’ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पैर के क्षतिग्रस्त और खो चुके हिस्से का पुनर्निर्माण किया।
डॉ. महाकालकर के अनुसार, इस प्रकार की जटिल पुनर्निर्माण सर्जरी के लिए अत्याधुनिक ऑपरेटिव माइक्रोस्कोप की आवश्यकता होती है। यह सुविधा लता मंगेशकर हॉस्पिटल में उपलब्ध होने से डॉक्टरों को बेहद नाजुक सर्जरी करने में मदद मिली। पूरी सर्जरी करीब सात घंटे तक चली।
ऑपरेशन में डॉ. पल्लवी, डॉ. विशेष्ठा और डॉ. परिमल ने सहयोग किया, जबकि डॉ. रचना नैताम ने एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी संभाली। सर्जरी के बाद इंटेंसिविस्ट डॉ. राकेश ढोके की देखरेख में मरीज को आईसीयू में रखा गया। वाइस डीन एवं मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. नितिन देवस्थले ने आवश्यक लॉजिस्टिक सहयोग उपलब्ध कराया।
प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. जितेंद्र मेहता, ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. सुशील मानकर और एनेस्थीसिया विभाग की प्रमुख डॉ. केतकी मरोडकर ने डॉक्टरों की टीम की इस उपलब्धि की सराहना की।
वीएसपीएम के उपाध्यक्ष एवं विधायक डॉ. आशीषराव देशमुख और एनकेपीएसआईएमएस के डीन डॉ. सजल मित्रा ने भी ट्रॉमा टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की जटिल पुनर्निर्माण सर्जरी विभिन्न विशेषज्ञों के बेहतर तालमेल, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और समन्वित प्रयासों से ही संभव हो पाती है।
अस्पताल पहुंचने के बाद ऑर्थोपेडिक्स, प्लास्टिक सर्जरी और इंटेंसिव केयर विशेषज्ञों की ट्रॉमा टीम ने मरीज की स्थिति का विस्तृत आकलन किया। डॉक्टरों ने पैर काटने के बजाय उसे बचाने का प्रयास करने का निर्णय लिया।
ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रचित मित्रा ने सबसे पहले दुर्घटना में कुचली हुई हड्डियों को स्थिर किया। इसके बाद माइक्रोवैस्कुलर प्लास्टिक सर्जन डॉ. समीर महाकालकर ने अत्याधुनिक ‘फ्री टिश्यू ट्रांसफर’ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पैर के क्षतिग्रस्त और खो चुके हिस्से का पुनर्निर्माण किया।
डॉ. महाकालकर के अनुसार, इस प्रकार की जटिल पुनर्निर्माण सर्जरी के लिए अत्याधुनिक ऑपरेटिव माइक्रोस्कोप की आवश्यकता होती है। यह सुविधा लता मंगेशकर हॉस्पिटल में उपलब्ध होने से डॉक्टरों को बेहद नाजुक सर्जरी करने में मदद मिली। पूरी सर्जरी करीब सात घंटे तक चली।
ऑपरेशन में डॉ. पल्लवी, डॉ. विशेष्ठा और डॉ. परिमल ने सहयोग किया, जबकि डॉ. रचना नैताम ने एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी संभाली। सर्जरी के बाद इंटेंसिविस्ट डॉ. राकेश ढोके की देखरेख में मरीज को आईसीयू में रखा गया। वाइस डीन एवं मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. नितिन देवस्थले ने आवश्यक लॉजिस्टिक सहयोग उपलब्ध कराया।
प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. जितेंद्र मेहता, ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. सुशील मानकर और एनेस्थीसिया विभाग की प्रमुख डॉ. केतकी मरोडकर ने डॉक्टरों की टीम की इस उपलब्धि की सराहना की।
वीएसपीएम के उपाध्यक्ष एवं विधायक डॉ. आशीषराव देशमुख और एनकेपीएसआईएमएस के डीन डॉ. सजल मित्रा ने भी ट्रॉमा टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की जटिल पुनर्निर्माण सर्जरी विभिन्न विशेषज्ञों के बेहतर तालमेल, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और समन्वित प्रयासों से ही संभव हो पाती है।




