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ऑफीस मे 40 मर्दों  के बीच वह अकेली 

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कॉम्प्युटर पर देखते थे अश्लील फिल्म

                        कार्यस्थलों पर  महिलाओं के साथ बदसलूकी कोई नई बात नहीं है । कई महिलाएं शर्म कें चलते उनके खिलाफ हो रहे जुल्म के खिलाफ वह मुंह नहीं खोलती। पर जब एक अकेली महिला 40 मर्दों के बीच अकेली काम करती हो और वह भी यह मर्द उसकें साथ न केवल बदसलूकी करे बल्कि उसके आगे कंप्यूटर पर गंदी फिल्म देखते थे। उस महिला ने हार नहीं मानी उसने इन लोगों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया और  मुआवजा पाया ।

40 मर्दों के बीच अकेली महिला और रोज का टॉर्चर

रोवेना ने साल 2015 में रेल हेडक्वार्टर में नौकरी शुरू की थी। उस वक्त विंबलडन सिग्नल सेंटर की 40 लोगों की टीम में सिर्फ 2-3 महिलाएं ही थीं। एंप्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल (कोर्ट) में यह साबित हुआ कि रोवेना ने नौकरी के दौरान 25 बार गंभीर लैंगिक भेदभाव  का सामना किया।

बदसलूकी की सारी हदें पार

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जो बातें सामने आईं वे चौंकाने वाली थीं। पुरुष कर्मचारी ऑफिस के कंप्यूटरों पर अश्लील वॉलपेपर लगाते थे और खुलेआम गंदी फिल्में देखते थे। एक बार तो रोवेना के सामने आपत्तिजनक खिलौना तक लहराया गया। सहकर्मी रोवेना के पास बैठकर जानबूझकर डकार लेते थे। एक कर्मचारी ने तो लगातार 15 मिनट तक डकार लेकर उन्हें परेशान किया।

जब भी रोवेना से कोई काम में गलती होती तो पुरुष सहकर्मी ताना मारते कि यही नतीजा होता है जब औरतों को सिग्नल बॉक्स में रखा जाता है। पुरुष कर्मचारी अक्सर महिला ट्रेन ड्राइवरों के बारे में आपत्तिजनक बातें करते और रोवेना के पास आकर सीटी बजाते थे।

शिकायत की तो नौकरी से निकाला, फिर जीती कानूनी जंग

जब रोवेना ने इस माहौल की शिकायत अपने सीनियर अधिकारियों से की तो कंपनी ने उन्हें इंसाफ देने के बजाय नौकरी से ही निकाल दिया। रोवेना ने हार नहीं मानी और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शुरुआत में उनकी दलीलों को खारिज किया गया लेकिन अपील के बाद नेटवर्क रेल कंपनी को अपनी गलती माननी पड़ी। कोर्ट ने माना कि रोवेना को लंबे समय तक मानसिक तनाव और भेदभाव झेलना पड़ा। अंततः कंपनी को उन्हें भारी-भरकम मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया गया।

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मुख्य संपादक : संजय पांडे

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