आरोग्य व सौंदर्य

ब्लॅक कॉफी शुगर लेवल कम करने मे हो सक्ती है मददगार

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भारत आज दुनिया की “डायबिटीज राजधानी” बन चुका है, जहां 10 करोड़ से अधिक लोग मधुमेह और 13 करोड़ प्री-डायबिटीज से जूझ रहे हैं। अक्सर मरीजों को जीवनभर दवाओं और इंसुलिन के इंजेक्शनों पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन हाल ही में हुए एक क्रांतिकारी अध्ययन ने नई उम्मीद जगाई है। वैज्ञानिकों का दावा है कि रोजाना दो से तीन कप कॉफी का सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में कुछ दवाओं से भी अधिक प्रभावी हो सकता है।

दवा की तरह काम करते हैं कॉफी के कंपाउंड्स 

जर्नल बेवरेज प्लांट रिसर्च में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, रोस्टेड अरेबिका कॉफी में तीन ऐसे प्रमुख कंपाउंड्स पाए गए हैं जो शरीर में अल्फा-ग्लूकोसिडेस (Alpha-glucosidase) नामक एंजाइम को ब्लॉक करते हैं। यह वही काम है जो टाइप-2 डायबिटीज की मशहूर दवा एकार्बोस (Acarbose) करती है। यह एंजाइम भोजन के बाद कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में तोड़ने का काम करता है। कॉफी इन एंजाइम्स को रोककर खून में अचानक शुगर बढ़ने (Spikes) को नियंत्रित करती है। हालांकि यहां कॉफी को बिना दूध या चीनी के पीने की बात की गई है।

कॉफी बनाम डायबिटीज की दवा: क्या है अंतर? 

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि ब्लैक कॉफी का असर शरीर पर प्राकृतिक उपचार की तरह होता है:

कार्बोहाइड्रेट का धीमा पाचन: दवा की तरह कॉफी भी पाचन प्रक्रिया को धीमा करती है जिससे ग्लूकोज धीरे-धीरे खून में मिलता है।

लिवर की सुरक्षा: कॉफी के सेवन से फैटी लिवर का खतरा कम होता है, जो डायबिटीज मरीजों में एक सामान्य समस्या है।

इंसुलिन पर निर्भरता में कमी: टाइप-2 मरीजों के लिए यह दवाओं और नियमित इंजेक्शन के बोझ को कम करने का एक प्राकृतिक जरिया बन सकता है।

सेवन का सही तरीका है जरूरी

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि कॉफी

का लाभ तभी मिलता है जब उसका सेवन सही तरीके से किया जाए। स्वास्थ्य लाभ के लिए:

  • कॉफी में दूध या चीनी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
  • दिन भर में 2 से 3 कप ब्लैक कॉफी पर्याप्त है।
  • इसे प्राकृतिक स्रोत के रूप में जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।

विशेषज्ञ की सलाह: “प्राकृतिक स्रोतों के माध्यम से शुगर कंट्रोल करना एक सुरक्षित विकल्प है। हालांकि, किसी भी मरीज को अपनी दवा छोड़ने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए।”

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मुख्य संपादक : संजय पांडे

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